
कैंटीन में सन्नाटा छा गया था। इति की चीख, अर्थ की गर्जन, और रोमी की लहूलुहान हालत ने सभी स्टूडेंट्स को स्तब्ध कर दिया था। हर कोई अपनी जगह पर जड़वत खड़ा था, जैसे कोई भयानक सपना देख रहा हो। रोमी फर्श पर पड़ा था, उसका चेहरा खून से सना हुआ था, और उसकी एक आँख सूजन की वजह से पूरी तरह बंद हो चुकी थी। उसकी साँसें घरघरा रही थीं, और वो अब बेहोशी की कगार पर था।
पिया, जो अब तक डर और सदमे में थी, अचानक अपनी जगह से उछलकर रोमी के पास दौड़ी। उसकी आँखें आँसुओं से भरी थीं, और वो हड़बड़ाहट में रोमी को संभालने की कोशिश करने लगी।








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