
इति रोते हुए बोली, “बताइए, मैंने जानबूझकर किया था कुछ? नहीं ना? फिर आप ऐसे कैसे बदल गए?” वो अब रोते हुए बोली, “पता है, उस दिन के बाद से मैंने ये जाना कि असलियत में अनाथ होना क्या होता है, अकेला होना क्या होता है। और अब मैं पूरी 18 की हो चुकी हूँ। मैं हर वो चीज़ कर सकती हूँ जो मेरा मन होगा। आप मुझे नहीं रोक सकते, समझे? मैं क्लब भी जाऊँगी, छोटे कपड़े भी पहनूँगी और हर वो चीज़ करूँगी जो मेरा मन होगा।”








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