यश और शाशा की शादी के फेरे होते होते रिश्तेदारों ने दोनों को फूलों से लाद दिया, जिसके बाद पूरे हाॅल में मिस्टर मलहोत्रा ने मिठाईयाँ बाँटवाई, कबीर और कोमल की भागने की सनसनी अब पीछे छूट चुकी थी। लोग यश और शाशा को आदर्श जोड़ी बता रहे थे दोनों सच में साथ में बहुत खूबसूरत लग रहे थे मिस्टर शर्मा और कबीर के पापा को मन ही मन गिल्ट हो रहा था की उनकी इज्जत को बचाने के लिए
शासा और यस को बलिदान देना पडा, असलियत तो वो दोनों ही जानते थे कि यह बलिदान नहीं, जीत थी उन दोनों की ।










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