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शादी या बर्बादी

नेत्रा, जो गहरी सोच में डूबी थी, बोली, "मैं तो इस बात से आगे सोच ही नहीं पा रही कि माँ भाई की शादी इतनी हड़बड़ी में क्यों करा रही हैं? और किस से करा रही वो भी नहीं पता भगवान ही बचाए उस बैचारी को मेरे डरावने भाई से" उसकी आवाज़ में चिंता थी "खैर, छोड़ हम कुछ कर भी तो नही सकते मेरे लिए तो एक चिज अच्छी है अकेली दीवारों से बात करने से अच्छा रहेगा कि एक जिती जागती लडकी मेरे साथ उस डरावनी हवेली में रहेगी मेरी भाभी बनकर कम से कम अपना दूख सूख तो बांट लिया करुंगी वरना माॅम डैड भाई तिनों में से कीसी के तिनों बिजी ही होते हैं "

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