आर्यमन अब धानी को उसके कपड़े पहना, उससे दूर होने को होता है कि तभी धानी खींचकर आर्यमन के गले से लग जाती है और उसकी पीठ को प्यार से सहलाते हुए बोली, “आर्य, यक़ीन करो, कभी तुम्हें छोड़कर नहीं जाऊँगी। तुम्हारे दिल के जिस भी कोने में ये डर बसा है कि तुम्हारी झील तुम्हें छोड़कर चली जाएगी, इस डर को अपने अंदर से निकाल दो। कुछ भी हो, मैं कभी तुमसे दूर नहीं जाऊँगी...”
आर्यमन भी कसकर धानी को पकड़ लेता है और धीरे से बोला, “अच्छा, अगर कभी मैंने कोई गलती कर दी तो?”











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