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बुरा सपना......

हल्की-हल्की ठंडी हवा एक भव्य और शानदार हॉल के खुले गेट से होकर अंदर दाख़िल हो रही थी, परदे और सजावटे हल्की हवा की लहर से डोर रही थी हाॅल की सजावट काफी खुबसूरत थी हर तरफ लाल और सफेद रंग के फुलों से सजावट की गई थी हाॅल के बीचों-बीच, सुनहरी रोशनी में नहाई हुई, एक लड़की खड़ी थी जिस का रंग दूध से भी गोरा था उस का लाल-गुलाबी लहंगा उस के ऊपर चमक रहा था उस लड़की की मासूम आँखों में एक अनजाना डर और साथ ही एख उत्सुकता भी था उसने अपने आस पास की भीड़ को देखा, लेकिन उसका ध्यान बार-बार उस हॉल के गेट की ओर जा रहा था, जहाँ से कोई आने वाला था।

तभी, हॉल में एक सन्नाटा छा गया। सबकी निगाहें गेट की ओर मुड़ गईं। वहाँ एक शख्स की आकृति दिखाई दी, जिसका चेहरा सेहरे से ढका हुआ था। उसकी चाल में एक अजीब-सा भारीपन था, मानो वह हर कदम के साथ हॉल की हवा को और ठंडा कर रहा हो। वह धीरे-धीरे मिहिका की ओर बढ रहा था और अगले ही पल वो मिहिका के सामने आकर रुक गया।

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