स्टोर रूम की मद्धम रोशनी में कबीर और कोमल के शरीर एक-दूसरे में पूरी तरह घुलते जा रहे थे। कबीर ने कोमल को मेज पर बिठाए रखा। उसकी टांगें फैली हुई थीं और कबीर उनके बीच खड़ा था। उसका एक हाथ कोमल की जांघों के बीच सरक चुका था। उंगलियां उसकी नरम, गीली pussy पर धीरे-धीरे घूम रही थीं। कोमल सिहर उठी। उसका शरीर अनायास कबीर की उंगलियों के स्पर्श पर प्रतिक्रिया दे रहा था।
“कबीर... रुक जाओ... ये गलत है...” कोमल ने सांसों के बीच फुसफुसाया, लेकिन उसकी आंखें बंद थीं और होंठ कांप रहे थे। कबीर ने जवाब में उसकी गर्दन पर गहरे किस किए। उसके दांत हल्के से उसकी नाजुक त्वचा को काट रहे थे, निशान बना रहे थे। “मैं नहीं रुक सकता, कोमल। तुम्हें यश के साथ नाचते हुए देखकर... मेरा खून खौल रहा है। तुम मेरी हो।”








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