आर्यमन धानी के कमर पर अपनी पकड़ कसते हुए बोला, “मेरी जलन... बस... आप ही कम कर सकती हो, झील।”
ये कहते हुए वो अगले ही पल झुक कर धानी के होठों को होठों में भर लेता है, जिससे धानी की आँखें ही बड़ी हो जाती हैं। वो आर्यमन को धक्का देने लगती है, पर आर्यमन धानी के दोनों हाथ को कसकर पकड़कर अपने सीने से सटाते हुए धानी के होठों को बेहद softly चूमने लगता है।








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