वॉशरूम में खामोशी सिर्फ़ कुछ पलों की थी। दोनों की साँसें अभी भी तेज़ चल रही थीं। शाशा यश के सीने से चिपकी हुई थी, उसकी टाँगें अभी भी काँप रही थीं। यश ने उसे धीरे से घुमाया – अब शाशा दीवार की ओर मुँह करके खड़ी थी, पीठ यश की छाती से सटी। यश ने शाशा की कमर पकड़ी और उसे आगे झुकाया। शाशा के हाथ दीवार पर टिक गए, कमर नीची, ass@ पीछे की ओर उठी हुई।
ये डॉगी पोज़िशन थी – शाशा पूरी तरह खुली हुई, यश उसके पीछे खड़ा।








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