यश ने और तेज़ किया – एक उंगली अंदर, जी-स्पॉट रगड़ते हुए। शाशा की बॉडी में झटके आने लगे। वो चीखी – “आआह्ह्ह… यश्श्श्श!” और झड़ गई – ज़ोर का ऑर्गेज़म। यश ने सब चूसा, एक बूंद नहीं छोड़ी।
पानी अभी भी बरस रहा था। शाशा की टाँगें काँप रही थीं, यश ने उसे सहारा दिया। दोनों हाँफ रहे थे। शाशा की आँखें बंद, शरीर ढीला। यश ने उसे बाहों में लिया, शावर बंद किया।








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