मीनल की बात पर अभ्रक का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया, और निशांत—वो तो अपनी बहन को फिर से शुरू होता हुआ देख अपना सिर पीटते हुए बोला,
“इसका तो कुछ हो ही नहीं सकता। मुझे लगता है मुझे फिक्र अपनी बहन की नहीं, बेचारे इस गुंडे, I mean, अभ्रक वशिष्ठ मेरे जीजा जी की करनी चाहिए कि वो कैसे झेलेंगे अब इसे।”








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