मौली के चेहरे पर पसीने की बूंदें उभरने लगती हैं। एक तरफ वीर उसके ऊभारों को चाटते हुए बाइट कर रहा था, दूसरी तरफ अपनी उंगलियों से मौली को तरपा रहा था। कुछ ही पल बाद मौली “आह्ह्ह...” कहते हुए डिस्चार्ज हो जाती है। वीर अपनी उंगलियों को मौली के अंदर से निकाल लेता है। अब वीर मौली के चेहरे को देखता है, जो आंखें बंद कर हांफ रही थी। वो अपने मुंह को अब मौली के सॉफ्टनेस में डाल चाटते हुए मौली के सॉफ्टनेस से निकल रहा सारा रस पी जाता है और अपने जीभ को मौली के सॉफ्टनेस में राउंड-राउंड में घुमाते हुए एक बार फिर मौली को गर्म करने लगता है। अब मौली अपने हाथों से वीर के चेहरे को अपने सॉफ्टनेस में प्रेस करते हुए आहें भरते हुए बोली, “आह्ह्ह… बस बस कीजिए प्लीज, मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रही… आह्ह्ह…”
मौली एक बार फिर से डिस्चार्ज हो जाती है, इस बार वीर के मुंह में ही अपना सारा रस छोड़ते हुए गहरी सांस लेने लगती है।








Write a comment ...