ऋतु को रोकते हुए बोली, "रुक, रुक, रुक ऋतु, क्या तुम्हे याद है, हमारे कॉलेज का सीनियर, वीर रायचंद, जो तेरा क्रश था। तुझे पता है, वो अब भी वैसा ही है। हॉट, हैंडसम और चार्मिंग, पर तू, तू अब वैसी नहीं रही। दो बच्चो की मां बन गई है। फिलहाल उसे देखते ही मेरा ईमान डोल जाता है। जी चाहता है कि कच्चा चबा जाऊ उसको। कल पूरे रास्ते याद करते हुए आई कि कहां देखा है इस hotty को, फिर याद आया कि ये तो वीर रायचंद है। उसे देख लगता है, अब भी सिंगल है। मैं भी तो सिंगल ही हूं, तो क्यों ना।"
ये सब याद आते ही मौली की सिटी पीटी गुल हो जाती है। वो वीर को देखती है, जो उसे ही तिरछा मुस्कुराते हुए देख रहा था। मौली बोली, "आप, आप डिनर करो।" वीर बोला, "ना, अब तो तुम्हे ही खाकर अपना पेट भरूंगा।" ये कहते हुए वो अपना हाथ मौली के सिने पर रख उसे हल्के हल्के सहला रहा था।








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