
अश्विन ने अपनी पैंट की ज़िप बंद करते हुए एक तिरछी मुस्कान के साथ ईवा की ओर देखा, उसकी साँसें अभी भी भारी थीं और उस के चेहरे पर पसीने की बूँदें चमक रही थीं। “आगे का मेरे बेडरूम में कंटिन्यू करते हैं,” उसने कहा। उसकी आवाज़ में एक अजीब सी उत्तेजना थी,
ईवा की आँखें अभी भी आँसुओं से भरी थीं और उसका शरीर थरथराने की हालत में था। अश्विन की बात सुनकर उसे अचानक अहसास हुआ कि कार कब की रुक चुकी है वह इतनी उलझन में थी कि उसे पता ही नहीं चला कि वे कब अश्विन के विला के सामने पहुँच गए। इससे पहले कि वह कुछ कह पाती, अश्विन ने उसके बंधे हुए हाथों से अपनी टाई खोली, उसने अपनी शर्ट उतारी और उसे ईवा को पहना दिया और बिना एक पल गँवाए, उसने ईवा को अपनी गोद में उठा लिया।







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